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Thursday, 10 September 2015

जब दिल किसी पे आता है

 तेरी आँखों में डूब जाने का दिल करता है
 तेरे होठों से छू जाने का दिल करता है
 तेरी यादों में मदहोश होने का दिल करता है
 तेरे लिये सबकुछ खोने का दिल करता है
 तेरे ही सपनों में सोने का दिल करता है 
 तेरे न होने पर रोने को ये दिल करता है
 तेरा ही बस होने को करता है 
 जाने क्यों डरता है पर पल पल ये मरता है
 अंदर ही अंदर जाने क्या ये करता है 
 जलता है बुझता है फिर चलता है  
 इधर उधर हर किधर से तुमपर हि आकर ठहरता है  
 लड़ता है झगड़ता है सबसे और खुद से फिर भी डरता है। 
 रुकता है संभालता है तुमपे जो टिकता है
 आता है जाता है फंसता और फंसाता है 
 ये दिल क्या क्या करता है और क्या क्या कराता है।
            जब दिल किसी पे आता है।