Sunday, 15 June 2014

nayisooch

एक  नज़र  देश  पर
........सब  कुछ  है  अपने  देश  में  ,रोटी  नहीं  तो  क्या .
........वादे  लपेट  लो  ,जो  लंगोटी  नही  तो  क्या .

आये  दिन  उत्तर प्रदेश और  देश  के  कई  स्थलों जहाँ  पर  खुदे  गड्ढों  से  सब  का  सामना  होता  है । ये कटाक्ष देश को चलाने वाले उन तमाम लोगों पर है जो खुदके और तराजू के बीच देश को तौल देते हैं खुदा के बाशिंदों की खुदाई किस कदर हमारे देश को ,हमारी सरज़मी को खोखली-कमज़ोर बुनियाद मे  जकड़े हुए है उस पर मै एक नज़राना पेश करता हूँ

यहाँ  खुदा  वहां  खुदा  सारा  जहाँ  खुदा  .....
ये शहर खुदा वो शहर खुदा हमारा देश भी  जगह  -2 पर  खुदा
भाइयों इस  बार  का  तो  वोट  बैंक  बेईमानी  से  जुदा  ,फिर  भी  न  जाने  हर  शख्स  जाने  ढूंढ़ता  किधर  खुदा .........

न  जाने  कितने  आये और  कितने  चले  गए  लेकिन  किसी  को  न  मालूम  कहाँ  खुदा
आज  के  रश्मों  रिवाजों  पर  सारा  भारत  फ़िदा  लेंकिन  ये  खुदा   का  बंदा जान  न   सका  कि  कौन  और  कहाँ  है  खुदा .
मंदिर  मस्जिद  की  ऊंचाइयों  से  चिल्ला  -चिल्ला  कर  सब  का  गला   है  रुँधा
लेकिन  अफ़सोस  बस  इस  बात  का 
 कि  कोई  न  जान  पाया  किसका  है  खुदा .
जब रात लेती है रुक्सत जब चाँद आस्मां से होता जुदा, तब सूरज देता रौशनी और दिन होता सदा |
जब जुर्म और झूठ को सच करता बेपर्दा ,तब इंसान और आवाम की शान बनता है खुदा|
क्यूंकि हर इंसान में बसता है खुदा!,
 हर कण में वो हर मन वो 
जन जन में वो जीवन में वोहि है बसा|
निर् आकर वो है साकार वो 
साक्षात हि हम में सधा ,
जो न हो जुड़ा वो है खुदा |
कुछ  और  भी  है  कहना  मुझको  ,
ये  जरूरी  है  समझना  सबको  ...
जो   नीति  है  उसको  न  बिगाड़ो ,
खुदा  के  बन्दे  हो  उसको  मनालो
मंदिर  मस्जिद  कि  दीवारों  से  उसको  मत  निकालो ,
वो  तो  तुम्हारे   दिल  में  है  उसे  मन  में  बसा  लो .
कमजोरों  कि  निशानी  है  खुदा  को  बुलाना ,
मंदिर मस्जिद कि दीवारों  पर  मढ़वाकर  उसको  सजाना जो  मजबूत  दिल  वाले  होते  हैं  वो  उसको  दिल  में  बसा  कर  रखतें  हैं ,
कमजोर  दिल  वालों  की  तरह  मंदिर -मस्जिद  में  सजाकर  नही  रखतें |.
खुदा  को  बुलाना  कमजोरों  की  निशानी  है  ,
खुदा  का  खुद  ब  खुद  आना  ही असलियत की बयानी है जो कहती  इंसानियत  की  कहानी  है ....
कहतें  हैं  इंसान  मरते  हैं  इंसानियत  मरती  नही ,
जवान  मरते  हैं  ,जवानी   मौत  से  डरती  नही .
आज  मै  सबसे  आह्वान  करता  हूँ ,
खुदा  का  बच्चा  हूँ  खुदा  को  ये  पल  दान  करता  हूँ .
दुनिया  में  खुदा  ही  एक  ऐसी  सख्सियत  है
 जिस  पे  सबका  अपना  हक़  है ,क्यूंकि  वही  एक  ऐसा  माध्यम  है  जो  सबको   एकसाथ  जोड़ता  है मिलजुलकर  साथ  रहने  और  साथ  देने  की  ताकत  देता  है , इसलिए   अपने  अंदर  के  इस  खुदा  को  पहचानो  और  बढ़ो  आगे  नौजवानों .